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मानसिक दुर्बलता (Mental Retardation)

बुद्धि और वाणी मनुष्य को अन्य प्राणियों से भिन्न करते हैं। इन क्षमताओं का विकास एक जटिल प्रक्रिया है। यह सहज संभव है कि कुछ मामलों में यह विकास सामान्य राह पर सामान्य गति से न चल पाए। दुनिया में हर तरह के लोग मिलते हैं। भिन्नता प्रकृति का नियम है। अधिकांश लोग बुद्धि में […]

घर से पहले – हॉफ – होम – एक विज़िट (1982)

मानसिक रोग कोई हौवा नहीं है। ऐसे व्यक्तियों से डरने या उन पर हंसने की बजाय हमें उनसे सहानुभूति रखनी चाहिये। हममें और मानसिक रोगियों में कोई खास अन्तर नहीं है, क्योंकि हम सब कभी मानसिक रुप से विचलित होते ही हैं। फिर इन लोगों से इतना परहेज क्‍यों? बेंगलौर में कुछ उत्साही स्वयं-सेवियों ने […]

न्यूरो सर्जरी

हमारे सपने, हमारे सुख-दुःख, हमारी आत्मा और हमारा प्रेम जहाँ बसता है, वह स्थान दिल नहीं, दिमाग है। मनुष्य के शरीर का यही एक ऐसा अंग है, जहाँ विज्ञान अपना सिर झुका कर खड़ा हो जाता है। लेकिन, चिकित्सा के क्षेत्रों में हो रही नई-नई खोजों ने खोपड़ी में दाखिल होने का रास्ता खोल दिया है। यहाँ पढ़िए तंत्रिका-तंत्र की शल्य […]

ब्रेन डेड

ब्रेन डेथ का अर्थ होता है मस्तिष्क मृत्यु। मस्तिष्क मृत्यु की अवधारणा लगभग 30, 40 साल पुरानी है। और यह अवधारणा  1970, 1980, 1990 के दशक में आई, जब विभिन्न देशों में बड़े अस्पतालों में गहन चिकित्सा इकाईयां (इंटेंसिव केयर यूनिट, मेडिकल केयर यूनिट) का विकास हुआ। उनकी स्थापना हुई तो बहुत से ऐसे मरीज […]

राष्ट्रवाद – स्वतंत्रता की स्वर्ण जयंती के दिन इंडियन मेडिकल असोसिएशन की बैठक में व्यक्तव्य

इन्डियन मेडिकल असोसिएशन की इस असाधारण व अभूतपूर्व बैठक में आप लोगों से मुखातिब होते हुए फक्र महसूस कर रहा हूँ। मेरा क्या वजूद है। इस अहम मौके पर मुझसे भी अधिक तजुर्बेकार वरिष्ठ सदस्य मौजूद हैं जिन्होंने गुलामी से आजादी मिलने के दौर को देखा है, भोगा है, शायद शिरकत भी की हो। उन्होंने ज्यादा दुनिया […]

हिन्दी में विज्ञान पत्रकारिता

1.0 परिभाषाएँ 1.1 विज्ञान विशिष्ट ज्ञान ज्ञान को प्राप्त करने, बढ़ाने, वृद्धि करने तथा पुष्टि करने की विशिष्ट विधियाँ, जिनकी शुरूआत किसीपरिकल्पना या सिद्धान्त से हो सकती हैं और फिर प्रयोगों और अवलोकनों द्वारा निष्कर्ष निकाला जाताहै। अनेक अवसरों पर अवलोकनों या डाटा से शुरूआत होती है और उसमें निहित फेक्ट्स द्वारा सिद्धान्त या परिकल्पनाओं […]

एक को धारूँ या सबको (विशेषज्ञता के बहाने)

एक को धारूँ या सब को। कुछ खास बीमारियों का विशेषज्ञ रहूँ या सब की सुधि रखूँ? होऊँ या न होऊँ? एक शाश्वत प्रश्न है। पुरानी दुविधा है। हर युग में नए रूप धरकर आती है। विशेषज्ञ होने के नाते या यूँ कहूँ ज्ञान के एक सीमित क्षेत्र में अधिकाधिक सीखने की अंदरूनी ललक के कारण यह […]

हिंदी माध्यम में चिकित्सा शिक्षा की चुनौतियाँ

 डॉक्टर और मरीज – तेरी भाषा मेरी भाषा वर्ष 2003 में मेरा पुत्र निपुण मुम्बई के सेठ जी.एस. मेडिकल कालेज (के.ई.एम. अस्पताल) में एम.बी.बी.एस अन्तिम वर्ष का छात्र था । मैं मिलने गया था । मेरी व उसके मित्रों की इच्छा थी की मैं उनकी एक अनौपचारिक क्लीनिकल क्लास लूँ जिसमें मरीजों से उनकी बीमारी […]

डॉ. हरिवंशराय बच्चन : जीवन और कृतित्व

डॉ हरिवंश राय बच्चन एक हीरे के समान थे। हीरे के अनेक फलक होते हैं। अनेक मुख या चेहरे या सतहे होती है। प्रत्येक फलक की अपनी आभा होती है। बच्चन जी की प्रतिभा के बहुतेरे रूप थे। प्रत्येक पहलू श्रेष्ठ से श्रेष्ठतर। वे सचमुच सरस्वती पुत्र थे। वैसे सांसारिक जीवन में उनकी मां का […]

पतंग और मांझा – पतंग को काटो पर ऊंगलियों को नहीं

पतंग दुनिया के बहुत से देशों में उडाई जाती है परन्तु लडाका पतंग (फाइटर काइट्स) केवल भारत और अपने उपमहादवीप के पडोसी देशों जैसे पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका में लोकप्रिय है। दो पतंगों के पेंच की लडाई में दूसरी पतंग की डोर को काट कर गिराने के खेल का आनन्द और रोमांच उसमें भाग लेने वाले ही […]

न्यूरो ज्ञान

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