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फ्लोट – प्लेन / सी प्लेन


इनका नाम सुना था। चित्र और फिल्म देखे थे। यलोनाइफ में पहली बार बैठने का, उठने का मौका मिला। संयोग की बात थी कि ऐन मौके पर हमें 2 सीट खाली मिल गई – मुफ्त में। 15 मिनट की लघुउड़ान थी, पर आनंद मिला मिला। एक अनुभव था। रोज की भांति हम साइकिल पर घूम रहे थे। नगर का नक्शा साथ था । बगैर विशेष योजना के इलाकों का मुआयना हो रहा था। येलोनाइफ के पुराने कस्बे में, झील के किनारे अनेक नौकाए (मोटरबोट कनोई, कयाक, पेडलबोर्ड, पालनौका), का बंधी पड़ी थी या विचरण कर रही थी।

छोटे-छोटे हवाई जहाज पानी पर तैर रहे थे। मन में इच्छा तो खूब थी। पर्यटकों के लिए व्यवसायीक कंपनियों द्वारा आधे घंटे तथा 1 घंटे की उड़ाने महंगी दरों पर उपलब्ध थी ( $150 और $250)। सोचा तलाश करते हैं। एक डॉकयार्ड में गहमागहमी थी। लोग थे। हवाई जहाज किनारे बंधा था। आयोजक स्वयंसेवक किस्म का बिल्ला, नेम प्लेट लगाएं कुछ लोग थे। चकटाली अधेड़ उम्र का व्यक्ति था। व्यस्त था ।

“हेलो सर! हम भारत से आए सैलानी युगल है। क्या हमें उड़ान में बैठने का मौका मिल सकता है?”

“बड़ी अच्छी बात है। आप इतनी दूर से, भारत से आए हैं। क्या आपने अपना नाम लिखवा दिया है।”

पंजीकरण करवा लिया है?”

“पंजीकरण? हमें नहीं पता कहां होता है कैसे होता है?”

” तो फिर आप वहां जाओ -आगे, फिर दाएं मुड़ना, कुछ सफेद तंबू उधर झील के किनारे हैं| मेरी पत्नी एक

ऑफिस में है। नाम है ‘मुरियल’| जल्दी जाओ। नाम लिखवाओ। कहना कि मैंने भेजा है।”

“सर.. सर.. धन्यवाद। आपका नाम.. (नेम प्लेट गौर से पढ़ते हुए) चकटाली।

“हां, चकटाली। नाम प्लेट दिखाते हुए, और मेरी वाइफ मुरियल । तुरंत वापस आओ।”

तीन पांडाल (तंबू) थे। एक ऑफिस नुमा था। दो खुले थे। खूब चहल-पहल थी । नाश्ता चल रहा था । ऑफिस में दो महिलाएं काम कर रही थी । व्यस्त थी। मुरियल ने कहा कि लिस्ट पूरी हो चुकी है। अब जगह नहीं है। मैंने कहा कि आपके पति ने चकटाली ने भेजा है। उसने फोन लगाकर पुष्टि करी। हमारे नाम लिखें, हम फिर भागे। हवाई जहाज तैयार था। 5 सीट वाला।

सफेद स्मार्ट ड्रेस वाले पायलट ने हमें चढ़ने, बैठने में मदद करी । सुरक्षा संबंधी हिदायतें बताई।

खिलौने के मॉडल जैसा छोटा सा डुगडुगा विमान था। दो चपटे लंबे समानांतर पहियेनुमा पैनल्स के सहारे पानी पर तैरता है। हमारे विमान में वैकल्पिक रूप से चार पहिया भी थे। एम्फीबियन विमान पानी पर भी उतर सकता है, जमीन पर भी। सभी सीट पर हेडफोंस भी थे। उनके द्वारा हम पायलट और एयर ट्रैफिक कंट्रोल रूम के मध्य सतत जारी संवाद को सुन सकते थे। सुनने में मजा आ रहा था अनुभव हो रहा था हो रहा था कि किस प्रकार की शैली में क्या-क्या बातें होती है। कंट्रोल रूम से प्राप्त हिदायतो का पालन करना होता है।

“तैयार रहिए!”

“आपका नंबर तीसरा है।”

“ट्रैफिक में शरीक हो जाइए”

“अभी आप की ऊंचाई 2000 फीट है। अब पंद्रह सौ फीट पर बने रहिए”

“45 डिग्री बाय और नार्थ वेस्ट की ओर मुड़ीये”

हल्का-फुल्का विमान, खुब हिचकोले लेता, कम्पायमान होता, शोर मचाता, मस्ती में लहराता सा लग रहा था। नीचे के परिदृश्य सुंदर, मनमोहक अनुठे थे। ऐसा नजारा कभी ना देखा था। जल और थल का घना, गुत्थम गुत्था जाल। यहाँ धरती वहां पानी। एक से एक नया पैटर्न। अनगिनत झीलें और तालाब। छोटी, बड़ी। विशालकाय। टेढ़े मेढ़े किनारे। अमीबा के आकार की। पानी के अनेक शेड। हल्का आसमानी नीला, गहरा नीला, हरा। झीलों के बीच भूमियों के टुकड़े भी उसी भांति छोटे-बड़े, बेतरतीब आकार वाले, उबड़ खाबड़, चट्टानी, उभरे हुए, भुरे कत्थई।चट्टानी उभारो के मध्य दबे हुए, गहरे, खाई नुमा इला​​कों में घने जंगल। बोरियल फॉरेस्ट। अधिकतर वृक्ष चीड(पाईन) की अनेक प्रजातियों के।

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