गूगल अनुवाद करे (विशेष नोट) :-
Skip to main content
 

गजनी – Ghajini


यह संतोष और खुशी की बात है कि अनेक न्यूरोलाजिकल व मानसिक अवस्थाओं पर आधारित फिल्में अब हमारे यहाँ पहले की तुलना में अधिकता से तथा बेहतर शोध के साथ बनने लगी है। या उनका उल्लेख होने लगा है। मन्दबुद्धिता (रोजा), एल्जीमर्स रोग (ब्लेक, यू.वी. हम.), साइजोफ्रेनिया (15 पार्क एवेन्यू), डिस्लेक्सिया (तारे जमी पर), मल्टीपल स्क्लेरोसिस (गुरू) आदि इसके उदाहरण हैं। इसी कड़ी में आमिर खान अभिनीत गजनी एक और अछूते न्यूरालाजिकल विषय लघुअवधि स्मृति दोष (शार्ट टर्म मेमोरी लास) या अग्रगामी विस्मृति (एन्टीरोग्रेड एम्नीसिया) से दर्शकों का परिचय कराती है। सिर पर सांघातिक चोट के कारण संजीव सिंघानिया (आमिर खान) का मस्तिष्क 15 मिनिट से अधिक समय तक कुछ याद नहीं रख पाता। वह अपना पुराना इतिहास, जीवन वृत्त लगभग पूरी तरह भूल चुका है। दुनियादारी की समझ है। भाषाओं का ज्ञान व क्षमता सामान्य है। लिखना पढ़ना आता है। जो याद रखना है वह उसे जगह-जगह लिख कर रखता है डायरी में, चित्रों के एलबम में, दीवारों पर और स्वयं के शरीर पर गोद कर। सिर्फ एक चीज नहीं भूला है। गजनी नाम के व्यक्ति से बदला लेना है। गजनी कौन है, कहाँ रहता है, कैसा दिखता है, कुछ याद नहीं। इसलिये लिख कर रखा है। ये सब बाते उसे किंसने बताई? कैसे याद रह गई? इनका उत्तर नहीं है। प्रत्येक सुबह उठने पर उसे समझ नहीं आता वह कहाँ है. यह कौन है, क्या करने वाला है। कमरे की दीवारों पर, कपड़ों पर और शरीर पर लिखी इबारतें, संख्याएं और चित्र उसे प्रतिपल पुनर्बोध कराते रहते हैं।

फिल्म के अन्य समग्र पहलुओं की चर्चा व समीक्षा करना  मेरा उद्देश्य नहीं है। एक न्यूरोलाजिस्ट के रूप में उसके मेडिकल पहलुओं पर कुछ कहना चाहूँगा। किसी खास विषय से सम्बन्ध रखने वाली फिल्मों को हम दो श्रेणियों में बॉट सकते हैं। एक तो व जिनका मूल उद्देश्य उस विषय या बीमारी के बारे में बताना होता है । उससे पीड़ित व्यक्तियों की जीवन दशा, घटनाओं, व्यथाओं, संघर्षों का वर्णन करना होता है उस अवस्था से जुड़े भावनात्मक, दार्शनिक मुद्दों पर बहस या चर्चा छेड़नी होती है। तारे जमीं पर, ब्लेक तथा 15 पार्क एवेन्यू काफी हद तक इसी कोटि में आती हैं। पात्र परिस्थितियाँ व कथानक फिल्म को रोचक बनाए रखने के लिये गढ़ी जाती हैं। हालीवुड में तथा अन्य देशों में ऐसी और भी श्रेष्ठ उदाहरण मौजूद है जिनमें पूरी ईमानदारी और शोधपरक मेहनत व समझ के साथ बिना विषय से भटके मनोरंजक, ज्ञानपरक भावनात्मक, विचारोत्तेजक फिल्में सफल हुई है। दुर्भाग्य से हमारे बालीवुड के निर्देशक व निर्माता, अपनी देश की जनता को मन्दबुद्धि समझते हैं और सोचते हैं कि बिना बम्बईया मसाले (नाच, गाना, मेलोड्रामा, नाटकीय संवाद) के उन्हें कुछ भी अच्छा नहीं लगेगा।

इसी वजह से भारत में दूसरी श्रेणी की फिल्में ज्यादा बननी हैं जो पिटे पिटाई ढर्रे की होती है। थोड़े बहुत नये पन के लिये कभी कभी कोई बीमारी या अवस्था को पटकथा में घुसा देते हैं। फिल्म गजनी की मूल सदाबहार थीम है बदला और याद्दाश्त खो बैठना। शार्ट टर्म मेमोरी लास या एन्टीरोग्रेड एग्नीसिया नामक बीमारी के बारे में बताना तथा उक्त पत्र की यथार्थवादी कहानी को कलात्मक व संवेदनात्मक रूप से प्रस्तुत करना इस फिल्म के निर्माता निर्देशक का उद्देश्य नहीं था। ऐसा होना सदैव जरूरी हो नहीं है फिर भी कुछ तो उम्मीद की जाती है। गजनी फिल्म इस दृष्टि से निराश करती है। लघुअवधि स्मृति दोष (शार्ट टर्म मेमोरी लॉस) के मरीजों की व्यथा कथा कुछ अलग ही किस्म की होती है। वे केवल भूतकाल में जीते हैं। उनका वर्तमान क्षण भंगुर होता है। वे भविष्य की कल्पना नहीं कर सकते। लक्ष्य आधारित व्यवहार उनके लिये सम्भव नहीं होता। वे अपनी व्यक्तिगत पहचान नहीं खोते जो याद रह पाये भूतकाल पर आधारित रहती है। अपनी पहचान पूरी तरह खो बैठना नाटकीय है पर वैज्ञानिक चिकित्सकीय अनुभव की दृष्टि अत्यन्त दुर्लभ।

***

<< सम्बंधित लेख >>

Skyscrapers
Tea time with Dr. Oliver Sacks : Visit and Interview

Dr. Oliver Sacks belongs to a rare breed of physician authors. He was born into a well to do Jewish…

विस्तार में पढ़िए
Skyscrapers
डॉ. आलिवर सॉक्स के साथ चाय पर गपशप

डॉ. आलिवर-सॉक्स चिकित्सक लेखकों की बिरली जमात के बिरले उदाहरण है । आपका जन्म 1933 में लन्दन में एक समृद्ध…

विस्तार में पढ़िए
Skyscrapers
‘पा और पा’ (पार्किन्सानिज्म और मेरे पापा)

चिकित्सा विज्ञान और मानवीय संवेदना का अनूठा संगम जब चिकित्सा विज्ञान की जटिलताओं को एक पुत्र की गहरी संवेदनाओं के…

विस्तार में पढ़िए
Skyscrapers
चंगेज खान के देश में भगवान बुद्ध के मंत्र

1990 के दशक में मैं एपिलेप्सी (मिर्गी), विशेष रूप से उसकी एडवोकेसी तथा जनशिक्षा के कार्य में सक्रिय था। रोटरी…

विस्तार में पढ़िए


अतिथि लेखकों का स्वागत हैं Guest authors are welcome

न्यूरो ज्ञान वेबसाइट पर कलेवर की विविधता और सम्रद्धि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अतिथि लेखकों का स्वागत हैं | कृपया इस वेबसाईट की प्रकृति और दायरे के अनुरूप अपने मौलिक एवं अप्रकाशित लेख लिख भेजिए, जो कि इन्टरनेट या अन्य स्त्रोतों से नक़ल न किये गए हो | अधिक जानकारी के लिये यहाँ क्लिक करें

guest
0 टिप्पणीयां
Newest
Oldest Most Voted
0
आपकी टिपण्णी/विचार जानकर हमें ख़ुशी होगी, कृपया कमेंट जरुर करें !x
()
x
न्यूरो ज्ञान

क्या आप न्यूरो ज्ञान को मोबाइल एप के रूप में इंस्टाल करना चाहते है?

क्या आप न्यूरो ज्ञान को डेस्कटॉप एप्लीकेशन के रूप में इनस्टॉल करना चाहते हैं?