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अपनी बात


डॉ. पौराणिक द्वारा अपनी बात:

न्यूरोज्ञान हिन्दी में ही क्यों हैं ? अंग्रेजी या अन्य भाषा में उपलब्ध क्यों नहीं हैं ?

न्यूरोज्ञान वेबसाइट विज़िट करने वाले दर्शकों के मन में इस तरह के सवाल जरुर आते होंगे, इन्ही सवालों का जवाब दे रहे हैं डॉ. अपूर्व पौराणिक (वीडियो देखे)

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2 Replies to “दो मित्रों में संवाद – धनवंतरी जयंती के अवसर पर”

  1. Very nice discussion however you seems to be extra polite. We can respect all old science they were the stepping stones for humanity to reach here but ultimately we have to apriciate where we have reached and do rationally. We can not move forward if we continue to look back.
    Only one data point.
    In 1947 india population was 36 crore today its 140 crore. If we consider indian civilisation of atleast 2000 than last 75 yrs weigh a lot more than previous 2000 yrs and the only reason is empericle science specially medical science and availability of food.
    For the bettermentbof each n everry human we have to think rationally and should proudly say the allopathy is far far better than other alternative medicines

  2. बहुत ही सार्थक बहस थी बहुत बहुत साधुवाद।
    मेरे पिताजी ने वर्ष 1964 मैं ग्वालियर से BAMS किया थाउस समय integrated type का सिलेबस था जिसमें आयुर्वेद के साथ साथ एलोपैथी का मिश्रण था। शायद वही सही था मेडिकल कॉलेज मैं BAMS को MD Medicine व MBBS को MD आयुर्वेद की पात्रता होना चाहिए यदि वे उचित NEET आदि से सेलेक्ट होते होंतो।
    धन्यवाद

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