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‘पा और पा’ (पार्किन्सानिज्म और मेरे पापा)


चिकित्सा विज्ञान और मानवीय संवेदना का अनूठा संगम

जब चिकित्सा विज्ञान की जटिलताओं को एक पुत्र की गहरी संवेदनाओं के साथ पिरोया जाता है, तो ‘पा और पा’ जैसी एक अनूठी और कालजयी रचना जन्म लेती है।

प्रख्यात न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अपूर्व पौराणिक द्वारा लिखित यह नई पुस्तक ‘पा और पा’ (पार्किन्सानिज्म और मेरे पापा) महज एक चिकित्सा-पुस्तिका नहीं है, बल्कि पार्किन्सन रोग (Parkinson’s Disease) के साथ जी रहे मरीजों, उनके परिजनों और चिकित्सा जगत के लिए एक बेहद उपयोगी और भावपूर्ण कृति है।

एक दोहरी किताब, एक दोहरी भूमिका

यह पुस्तक अपने आप में अनूठी है क्योंकि यहाँ लेखक एक ‘दोहरी भूमिका’ में नजर आते हैं—पहला, एक अनुभवी न्यूरोलॉजिस्ट के रूप में और दूसरा, एक समर्पित पुत्र के रूप में। डॉ. अपूर्व पौराणिक जी ने अपने दिवंगत पिता श्री कृष्ण वल्लभ पौराणिक जी (1929-2016) की पार्किन्सन रोग के साथ 10-15 वर्षों की यात्रा में उनकी सेवा, सुश्रुषा और उपचार किया।

पुस्तक में दो समानान्तर धाराएं साथ-साथ चलती हैं:

  1. वैज्ञानिक दृष्टिकोण: पार्किन्सन रोग के विभिन्न मेडिकल पहलुओं, लक्षणों और अवस्थाओं का सरल, प्रांजल और प्रवाहमान हिन्दी में विस्तृत वर्णन।
  2. भावनात्मक दृष्टिकोण: एक पुत्र द्वारा पिता की रोग-कथा का अत्यन्त लगाव और संवेदनशीलता से किया गया मार्मिक चित्रण। जीवन के अन्तिम दिनों में कैसे बुद्धि, गति और चेतना की रोशनियां धीरे-धीरे लुप्त होने लगती हैं, इसका हृदयस्पर्शी वर्णन इस पुस्तक में है।

यह पुस्तक क्यों पढ़ें?

  • मरीजों और परिजनों के लिए: यह पुस्तक पार्किन्सन रोग के बारे में ज्ञान और समझ बढ़ाकर अज्ञान जनित भय, कुंशका और अनिश्चितता को मिटाती है। यह मरीजों और उनके देखभालकर्ताओं (Caregivers) का आत्मविश्वास बढ़ाती है ताकि वे उपचार प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभा सकें।
  • डॉक्टर्स और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए: यह पुस्तक एक मानक (Template) प्रस्तुत करती है कि मरीजों और परिजनों की ‘हेल्थ लिटरेसी’ (स्वास्थ्य साक्षरता) बढ़ाने के लिए किस तरह की सरल भाषा और मानवीय करुणा, विनम्रता व सहानुभूति का उपयोग किया जाना चाहिए।

पुस्तक की मुख्य विशेषताएं:

  • पार्किन्सन रोग के शुरुआती से लेकर अंतिम चरणों (Early to late stages) का सत्य और स्पष्ट वर्णन।
  • 55 चित्रों, 11 तालिकाओं (Tables) और 6 परिशिष्टों (Appendices) के साथ बेहद समृद्ध सामग्री।
  • अंग्रेजी के प्रभुत्व वाले दौर में, हिन्दी भाषा में वैज्ञानिक तथ्यों को अभिव्यक्त करने का एक सशक्त और सफल प्रयास। लेखक का स्पष्ट मानना है— “भरे को क्या भरना!”

लेखक के बारे में:

डॉ. अपूर्व पौराणिक, महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय (M.G.M), इन्दौर के पूर्व प्राध्यापक और एक अति लोकप्रिय क्लिनिकल न्यूरोलॉजिस्ट हैं। वे हिन्दी के परम उपासक हैं और जन स्वास्थ्य शिक्षा, मरीज-परिजन शिक्षा (Health Literacy) तथा मेडिकल ह्यूमैनिटीज (Medical Humanities) को बढ़ावा देने के मिशन में निरंतर जुटे हुए हैं। ‘न्यूरो ज्ञान’ वेबसाइट और उनके अन्य प्रयास इसी दिशा में मील के पत्थर हैं।

अपनी प्रति आज ही मँगवाएं:

अगर आपके परिवार में कोई पार्किन्सन से प्रभावित है, या आप चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े हैं, या फिर केवल एक बेहतरीन मेडिकल-कथा पढ़ना चाहते हैं, तो यह पुस्तक आपके लिए ही है।

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क्या आपके परिवार या परिचितों में किसी ने पार्किन्सन या किसी अन्य दीर्घकालिक बीमारी का सामना किया है? एक डॉक्टर और मरीज/परिजन के बीच संवाद कैसा होना चाहिए, इस पर आपके क्या विचार हैं?

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