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हरा भरा रेगिस्तान : सोनोरन

कुछ वर्ष पूर्व दिसंबर की गुनगुनी ठंड में हम तीन मित्र परिवारों ने जोधपुर से जैसलमेर और आगे तक की यात्रा की थी। पुराने किलो, महलों, हवेलियों, और राजस्थानी लोक संस्कृति के अतिरिक्त रेगिस्तान देखने का कौतूहल था। मन में एक छवि थी जो पत्रिकाओं, लेखों, फिल्मों आदि से बनी थी। दूर तक विरान, सुनसान, सूखा, भुरा दृश्य और एक के बाद एक […]

यूथ होस्टल के बहाने हांगकांग और हांगकांग के बहाने यूथ होस्टल

यथू होस्टल की मेरी सदस्यता सक्रिय तो नहीं कही जा सकती । सच तो यह है कि प्रस्तावित विदेश यात्रा में सुविधा की दृष्टि से मैंने आजीवन सदस्यता लेने का निर्णय लिया था। यूथ होस्टल आन्दोलन के उद्देश्यों और कार्यकलापों से थोडा परिचय था, इन्दौर शाखा पदाधिकारियों को एक बैठक में सुना था । कुल मिलाकर […]

वर्तमान पीढ़ी का “ओल्ड बॉयज” के प्रति

स्वागत है आप सबका। इस महान संस्था के सौ साल पूरे होने के समारोह में आये, आप सबों का स्वागत है। हम, इस महाविद्यालय के वर्तमान छात्र आपका अभिनन्दन करते हैं और शुभकामनाएं व्यक्त करते हैं कि इस अवसर पर आप यहाँ आत्मीय वातावरण पायें व संतष्ट हों। लेकिन सबसे पहला ही प्रश्न जो उठता है, उसका उत्तर […]

दिल्ली के दंगे – एक डॉक्टर की डायरी

यह लेख किसी ख्यातनाम पत्रकार का नहीं है, बल्कि उस डॉक्टर की डायरी के कुछ हिस्से है, जो उसने दिल्‍ली के आयुर्विज्ञान संस्थान में उन दो दिनों के दौरान लिखे, जब पूरा दिल्‍ली जल रहा था…..! बुधवार 31 अक्टूबर को दिन में ग्यारह बजे सिटी बस में बैठ कर स्टेशन जा रहा था अपना स्कूटर लाने के लिए। […]

सेवानिवृत्ति उदगार

कविवर सुमित्रानन्दन पन्त ने अपनी एक प्रसिद्ध रचना में कहा था ‘परिवर्तन ही जीवन का एक मात्र सत्य है। और सब बातें परिवर्तनशील हैं। यही एक सत्य अटल है।” किसी व्यक्ति के जीवन में परिवर्तन, भले ही आंशिक परिवर्तन, का यह आधारभूत सत्य क्यों आयोजित किया जा रहा है? इसके पीछे एक आस्था है, विश्वास है कि परिवर्तन प्राय: भले के […]

दुर्घटना के बहाने चिंतन

प्रिय मित्रों, दिनांक 3 सितम्बर 2009 को दोपहर 2 बजे मैं एक सड़क दुर्घटना का शिकार हुआ । एम.वाय. अस्पताल के न्यूरालाजी विभाग में काम करते समय मुझे सुयश अस्पताल से फोन आया कि एक मरीज को सिर्फ दो घण्टे पूर्व लकवे (पक्षाघात ) का दौरा शुरू हुआ है । उसे तुरन्त आ कर देखें […]

एड्स रोग के मनो-सामाजिक पहलु

वैसे तो मनुष्य का इतिहास विभिन्न जीवाणुओं से लड़ने का रहा हैं। इस धरती पर बहुत साड़ी स्पीशीज़ रही और जो जीवाणु है जिसमे की हम बेक्टेरिया, वायरस, प्रोटोजोआ, पैरासाइट सबको गिनते हैं पर जीवियों को भी जो इस धरती पर रहते है, और मनुष्य भी इस धरती पर रहा हैं, और उसके संघर्ष की कहानी है, वो भी अनादि काल से […]

सारे जहां का दर्द हमारे जिगर ‘लिवर’ में है।

प्रसिद्ध यूनानी नायक पृमथ्यु स्वर्ग से आग चुरा लाया था, धरती के लोगों के लिये। स्वर्ग के देवताओं ने उसे सजा दी थी एक शिला पर जंजीर से बांधकर – जहां रोज गरूड़ आदि पक्षी नोंच-नोंच कर उसका लीवर खाते थे – लीवर फिर उग आता था। पीड़ा चलती रहती | इस पुरातन कथा में एक वैज्ञानिक तथ्य […]

नकली दिल

‘बहुत शोर सुनते थे पहलू में दिल के, चीरा तो कतरा–ए–खून मिला।‘ शायर की इस कल्पना को अमेरिकी डॉक्टरों ने साकार कर दिया है। नकली हाथ पैर की तरह ‘नकली दिल’ भी पैदा कर लिया गया है। इस नकली दिल के सहारे दिल का एक मरीज (मरीज असली है) जिन्दा है और डॉक्टरों को उम्मीद है कि वह […]

सत्य के चेहरे (बतायें या न बताएँ ?) – एकांकी

(मिर्गी के मरीजों और परिजनों के साथ डॉक्टर की मीटिंग) मंच पर एक मीटिंग का सेट लगा है। एक पोडियम पर माइक है जहां से डॉक्टर संबोधित कर हे हैं। सामने लगभग दस स्त्री-पुरुष एक गोलाबनाकर कुर्सियों पर बैठे हैं। मिर्गी रोग से सम्बन्धित बैनर और पोस्टर लगे हुए हैं। डॉक्टर – मित्रों आज हमने […]

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