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Genetics / आनुवंशिकता


कुलीन होने का वैज्ञानिक अर्थ
आनुवंशिकता का अर्थ है माता-पिता व अन्य पूर्वजों से सन्तानों को प्राप्त होने वाले गुण । गुण हजारों प्रकार के । नाक का सुतंवा होना, आँख का नीला होना, बालों का धुंघरालु होना । दुबलापन, मोटापन, गंजापन, गोरा होना । आधे गुण माँ से, आधे पिता से । बीमारी न होना या होना भी आनुवंशिकता पर निर्भर करता है।
माँ के गर्भ में जब बच्चे का बीज बनता है उस समय आधी किस्मत तय हो जाती है। बाकी आधी किस्मत पर प्रभाव पड़ता है गर्भ के नौ महीने व जन्म के बाद की जिन्दगी का । परवरिश, खानपान, संस्कार शिक्षा-दीक्षा, वातावरण आदि सबका असर पड़ता है। गर्भ में बच्चे का बीज बनते समय आधी किस्मत की जो भृगुसंहिता लिखी जाती है उसमें से आधे मंत्र माँ के तरफ से व आधे पिता की तरफ से आते हैं। कुछ मंत्र शक्तिशाली होते हैं । जो कह दिया सो घटित होकर रहता है। अन्य मंत्रों की शक्ति कम या कमतर होती है। उनका फलित घटने के लिये “किन्तु-परन्तु-यदि-जबकि” वाली शर्ते पूरी होना चाहिये । इन शर्तो का पूरा होना या न होना बाद वाली आधी किस्मत के हाथ होता है। अर्थात दोनों का मेल होना जरूरी है। कुछ मामलों में ये मंत्र मौन रहते हैं या तटस्थ रहते हैं। जिन्दगी को जो खेल खेलना है, खेल ले । आनुवंशिकता न इस तरफ, न उस तरफ। इसी को अंग्रेजी में कहते हैं नेचर (nature प्रकृति) और नर्चर (nurture परवरिश) की साझी पारी जो पूरी जिन्दगी चलती है।
गर्भ में बच्चे का बीज बनते समय आधी किस्मत की भृगुसंहिता के हजारों मंत्र माँ की तरफ से अण्डकोष में और पिता की तरफ से शुक्राणु में भर कर आते हैं। इन मंत्रों की भाषा संस्कृत से भी हजारों लाखों साल पुरानी और उससे अधिक क्लिष्ट है। उस भाषा की वर्णमाला में सिर्फ चार अक्षर हैं व उनसे मिलकर बनने वाले बीस-पच्चीस शब्द । गुप्त भाषा है । कूट लिपि है । लाखों संदेश हैं ।
प्रत्येक संदेश या मंत्र. शब्दों की एक लम्बी लड़ी है । प्रत्येक लड़ी में हजारों लाखों शब्द हैं। एक मंत्र यानि एक जीन । एक जीन यानि संकेत लिपि की एक लम्बी व दोहरी कड़ी । इन मंत्रों की एक खास विशेषता है ये अपनी फोटो कापी खुद बनाते हैं। चाहे जितनी बनाते हैं । खूब तेजी से बनाते हैं। सटीक व सही बनाते हैं। एक कोशिका से दूसरी कोशिका । एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी । फैलाते जाते हैं।

ये संदेश, ये मंत्र, ये जीन कैसे किस्मत को नियंत्रित करते हैं ? प्रोटीन नामक रासायनिक पदार्थो की रचना व निर्माण को गति देकर । प्रोटीन भी लाखों प्रकार के । प्रोटीन के अनेक काम । कोशिकाओं व ऊतकों के निर्माण में । एन्जाइम या उत्प्रेरकों के रुप में । एण्टीबाडी के रूप में, जो विदेशी पदार्थो से लड़ती हैं । हार्मोन्स के रूप में । शरीर का चप्पा-चप्पा किसी न किसी किस्म के प्रोटीन का बना है तथा किसी न किसी किस्म के प्रोटीन द्वारा वहाँ की रासायनिक क्रियाएँ नियंत्रित हो रही हैं।
इनमें से किसी एक प्रोटीन की रचना में थोड़ी सी गड़बड़ी हुई तो पता नहीं क्या-क्या ढा सकता है। हर किस्म की बीमारी सम्भव है । यदि उक्त मंत्र या संदेश कमजोर शक्ति व कम महत्व का हुआ तो शायद एकदम से बीमारी न हो, परन्तु बाद के हालातों पर निर्भर करता है। परिस्थितियाँ व वातावरण ठीक रहा तो स्वस्थ जिन्दगी गुजर सकती है अन्यथा बीमारी सिर उठा लेती है।

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